सांगवानों का इतिहास

सांगवान गोत्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में पाया जाने वाला जाटों का वंश गोत्र है. इनके पूर्वजों का निकास "सारसु जांगला" मारवाड से माना जाता है. इस वंश के १३ या १४ राजाओं ने सारसु जांगला पर राज्य किया. इनके आदि राजा से लेकर १३ पीढी तक "सारसु जांगला" पर राज्य करते रहे जिनके नाम क्रमश: इस प्रकार है - आदि राजा, युगादी राजा, ब्रह्मद्त्त राजा, अतरसोम राजा, नन्द राजा, महानन्द राजा, अग्निकुमार राजा, मीर राजा, मारिच राजा, कश्यप राजा, सूरसेन राजा, सूर्य राजा तथा शालीवाहन राजा. १४वीं पीढी में लैहर हुआ जो मारवाड छोडकर अपने साथियों सहित अजमेर आ गया. यहां उसकी पदवीं राणा की हो गई. उसके वंशजों ने अजमेर के आसपास की भुमि पर नौ पीढी तक राज्य किया. राणा लैहर ने जिस स्थान को अपनी राजधानी बनाया था. वह वर्तमान का लिहडी गांव है. आज से लगभग ७४४ वर्ष पूर्व राजस्थान के नैणू सिरोहा राजपुत ने अपने काफिले सहित चरखी दादरी के नजदीक बग्गनवाल पहाडी यानि वर्तमान प्रचलित नाम असावरी की पहाडी पर डेरा जमाया. सिरोहा राजपुत के चार साहसी पुत्रों सांगु, जाखु, कादयां व कलकल की मदद से बीहड जंगलों को काट काट कर उपजाऊ भुमि मे बदला तथा बसना आरम्भ किया. जनश्रुति के अनुसार यहां के कुछ भागों मे अहीरों की बस्तियां होती थी. सांगु व उसके साथियों ने अहीरों को यहां से खदेड दिया और उनके भू-भाग पर कब्जा कर लिया. सांगवान खाप के इतिहास व वर्तमान बुजुर्ग प्रधान कर्नल रिसाल सिंह के अनुसार सांगु ने ही सांगवान गोत्र चलाया. सांगु का जन्म मीति चैत्र सुदी ५ वर्ष १३०१ विक्रमी सम्वत १२४४ ई. में हुआ था. सांगु के भाइयों जाखु ने जाखड, कादयां ने कादयान व कलकल ने कलकल गोत्रों का शुभारम्भ किया. सांगु की पहली शादी डीघल गांव के अहलावत गोत्र में फूलां देवी से हुई. उनकी पहली पत्नी से छ: पुत्र पैदा हुए - देवसी, बीजा, बेगा, जीता, पोथा व गोगा. दूसरी शादी झुम्पा कलां गांव के श्योराण गोत्र में बुजी देवी से हुई. उससे भी छ: पुत्र पैदा हुए - जगसी, खेमू, बिन्दा, डुंगरसी, रामदास व मोजी. सांगु की तीसरी पत्नी का नाम सारां था जिससे एक पुत्र पैदा हुआ जिसने चरखी गांव बसाया. सांगवान खाप की प्रधानता भी चरखी गांव ही करता है. सांगु के बडे बेटे देवसी ने तिवाला गांव बसाया, बीजा ने बिरही गांव, बेगा ने गुडाना गांव, जीता ने रामलवास गांव, पोथा ने खेडी बुरा गांव व गोगा ने खेडी बत्तर. आठवें पुत्र खेमू ने झोझु गांव व ग्यारहवें पुत्र रामदास ने महडा गांव बसाया. बाकि के चार पुत्रों की शादियां नहीं हुई अथवा नि:संतान रहें. ये चार जगसी, बिन्दा, मोजी व डुंगर किसी अन्य जगह जाकर रहने लगे. सांगु अपने अंतिम दिनों में खेडी बूरा गांव मे ही रहा और भाद्र सुदी द्वादशी वि.स. १३६९ ई.स. १३१२ में उनकी मौत हुई. खेडी बूरा में ही सांगु की समाधि पर भव्य स्मारक बनाया गया है. सांगवान खाप द्वारा निर्मित यह स्मारक लगभग ४० फुट ऊचां है. इसके एक ओर लोहारु नहर है तथा दूसरी ओर गांव का जलघर है.

सांगवान खाप को जब भी धार्मिक सामाजिक अथवा राजनैतिक मामलों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेना होता है तो सांगु धाम पर ही सबकी सहमति से लिए गये निर्णायक फैसले पर मुहर लगाई जाती है. सांगवान खाप की पंचायत में एक कुर्सी ताजपोशी के रुप में सांगवान खाप के प्रधान चरखी दादरी के लिए तथा दूसरी सांगवान बाइस गांव की कन्नी बिरही कलां के प्रधान के लिए रखी जाती है. शेष समस्त पंचायत भूमि पर बैठकर ही सबके विचार सुनने के पश्चात ही विवेक [ आगे पढ़ें... ]